रामपोल में चातुर्मास कि धर्म सभा

Religious gathering of Chaturmas 
in Rampol

संवादादता : मोहम्मद रफीक/नागौर

नागौर रामपोल सत्संग भवन में संगीतमय चातुर्मास सत्संग समारोह को संबोधित करते हुए रामनामी महंत मुरली राम महाराज भक्त चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति अपने पुरुषार्थ से नहीं की जाती है भक्ति तो करपा से प्राप्त होती हैं जब तक जीवन में संत कृपा नहीं है तब तक जीवन अधुरा है कृपा पात्र वही होता है जो शिष्य आज्ञाकारी है संत तो वृक्ष के समान होते हैं वृक्ष अपने लिये नहीं जीते वह परहित जीते हैं उसी प्रकार संत भी परहित के लिए जीते हैं भक्त चरित्र में भक्ति का वर्णन करते हुए भक्ति जीवन कि एक शक्ति है भोजन करते हैं तो शरीर को शक्ति मिलती है ओर उस तत्व का वर्णन करते हैं तो आत्मा बलवति होती है आत्म चिंतन करने वाला का कमल के समान जीवन होता है कमल पानी में निर्लिप्त आशाक्ति रहित रहता है अशक्ति जीवन को बांध देती हैं ओर संत जीव को मुक्ति प्रधान करते हैं भक्ति तो जीवन का श्रंगार है स्नान क्यों करते हैं अपने सुख अपनी सुंदरता के लिए स्नान के बाद वस्त्र क्यों पहनते हैं अपने सुख के लिए अपने आनंद के लिए उसी प्रकार संत की शरणागति में जाकर उनके उपदेश से स्नान करो स्नान से हि तो मन का मेल दुर होगा संतों के चरणों का चिंतन करना उनको याद करना यही तो सुंदर वस्त्र पहनना है भक्ति जीव को परमात्मा से मिलाती हैं बिना भक्ति के जीव का कल्याण नहीं है भक्ति करते हैं गुरु कि भक्ति करते हैं माता पिता कि भक्ति करते हैं जगत कल्याण कि भक्ति करते हैं परोपकार की यही तो सच्चा धन है सज्जनों का धन होता है सज्जन लोग किसी को कष्ट नहीं देते हैं स्वयं दया करते हैं दया हि तो परमात्मा कि जननी है धर्म कि जननी है जिस मनुष्य में दया नहीं है वह मानव नही है व दानव है जीवन में दयालु बनों दया हि धर्म का मूल है ओर पाप का मूल अभिमान है जीवन में स्वाभिमान होना जरूरी है लेकिन अभिमान नहीं होना चाहिए इस अवसर पर रामेश्वर भाकरोद कैलाश वैष्णव नंदकिशोर बजाज मुरलीधर सोनी राजु कछावा बड़ली महेंद्र प्रजापत शंकरलाल सैन कांतिलाल कंसारा केवलचन्द टेलर सहित अनेक लोग मौजूद रहे

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