हर वर्ष की भांति पेच रिपेयरिंग के नाम पर लूट रहा सरकारी ख़ज़ाना !

Like every year, the government treasury 
is being rob in the name of repair!

*सरकारी काम की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल ,ज़िम्मेदार कोन ?*

(अभय सिंह चौहान)

हर साल की तरह बारिश से प्रभावित प्रमुख सड़कों पर आवागमन में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए, जेडीए नगर ,निगम द्वारा अपने अभियंताओं को विभिन्न क्षेत्रों में त्वरित रुप से पेच रिपेयर कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अभियान के तहत जीएसबी, डब्ल्यूबीएम, मिट्टी के कट्टे और कोल्ड मिक्स जैसी विधियों का उपयोग कर मरम्मत का कार्य किया जाता है।
विशेष रूप से, सीवर लाइन, पीएचईडी बीसलपुर पाइप लाइन, टॉरेंट गैस लाइन तथा ड्रेनेज खुदाई से प्रभावित मार्गों पर पेच वर्क किया जाता है इसके अतिरिक्त मिट्टी के कट्टे भिजवाए जाते हैं ताकि जल निकासी की समस्या को कम किया जा सके।
जेडीए ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं।
हर वर्ष की तरह भविष्य में ऐसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जेडीए द्वारा दीर्घकालिक योजना भी तैयार की जा रही है। जेडीए के अधिकारियों के अनुसार यह अभियान निश्चित ही शहरवासियों के लिए राहतदायक सिद्ध होगा और जयपुर की सड़क व्यवस्था में व्यापक सुधार लाएगा !

*पेच रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्ति*

बारिश के मौसम में हर वर्ष पेच रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्ति कर सरकारी ख़ज़ाने में सेंध लगायी जाती है उसके बाद दुबारा उन्हीं कामों का नए सिरे से टेंडर कर दुबारा भुगतान उठाया जाता है , मिली जानकारी के अनुसार खड्डों में मिट्टी और रोडी के कट्टे डालकर पेच रिपेयरिंग के नाम पर लाखों रुपये के बिल बनाए जाते हैं और दुबारा बारिश में वो मिट्टी बहकर फिर खड्डे में तब्दील हो जाती है, पेच रिपेयरिंग के कार्य इतनी जल्दी में किए जाते हैं कि टेंडर भी कार्यों के बाद किए जाते हैं ,बाद में अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से बिना नाप जोख के या खानापूर्ति कर भुगतान कर दिया जाता है !

*सरकारी कामों की गुणवत्ता जाँचने वाले अधिकारी श़क के दायरे में*

लेकिन हर साल वर्षा के मौसम में सड़क,सीवर लाइन, पीएचईडी पाइप लाइन, गैस लाइन तथा ड्रेनेज के कारण शहर की आम जनता परेशान क्यों होती है, क्या सरकारी कामों की गुणवत्ता और रख रखाव का कार्य देखने वाले अभियंता इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है ?

साथ ही नगर निगम जेडीए और उसके ठेकेदारों की कार्यप्राणाली भी समझ से परे है।क्या काम में सामाग्री दोयम दर्जे की लगाई जाती है जो पहली वर्षा के बाद ही सड़के ,सीवर लाइन ,पानी की लाइन टूटकर गड्ढों में तब्दील हो जाती है और सड़क के गड्ढे जानलेवा साबित हो जाते हैं,बारिश के दौरान सड़क में बने ये गड्ढे बता रहे हैं की काम दोयम दर्जे का किया गया था,परिणामस्वरुप महज कुछ दिनों में गड्ढे उभर कर सामने आ रहे हैं और इसमें पानी भरने से वाहन चालकों के लिए जानलेवा भी साबित हो रहे है।
मानते हैं कि यदि जल्द ही गड्ढे नहीं भरे गए तो दुर्घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता है, लेकिन इन गड्ढों लिए ज़िम्मेदार कौन ?

abhay