प्रेमानंद महाराज जी ने अपने एक प्रवचन में व्रत का सही मतलब बताया है। उनका कहना है कि व्रत में कुट्टू की पकौड़ी, खीर या फिर साबूदाना खाना सही नहीं है। चलिए जानते हैं कि आखिर उनके हिसाब से व्रत के समय क्या चीजें लेनी चाहिए?
सावन का पावन महीना चल रहा है। इस दौरान पूजा पाठ करने का अलग ही महत्व होता है। वहीं भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग व्रत भी रखते हैं। माना जाता है कि इस महीने में व्रत रखकर अगर कोई मनोकामना मांगी जाए तो भगवान शिव वो जरूर पूरी करते हैं। सावन या फिर किसी भी व्रत के कई नियम भी होते हैं जो ना पूरे करने पर अक्सर टूट भी जाया करते हैं। व्रत में खाने-पीने का भी खूब ख्याल रखा जाता है। तामसिक भोजन ना करके सिर्फ सात्विक आहार ही व्रत में लिया जाता है। वहीं तमाम लोग व्रत के दौरान कुट्टू की पकौड़ी, समा के चावल की खीरऔर साबूदाने की खिचड़ी भी भोजन के रूप में लेते हैं। वृंदावन के मशहूर संत प्रेमानंद महाराज ने इस पर अपनी राय सामने रखी है। उन्होंने बताया है कि व्रत में ये चीजें खाना सही है भी या नहीं?
प्रेमानंद महाराज ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि हम उपवास क्यों करते हैं? ताकि हमारे आराध्य देव प्रसन्न हो। हम इसलिए खुद को जानबूझकर कष्ट देते हैं। जब इस शरीर को आहार नहीं मिलेगा। दाना पानी नहीं मिलेगा तो प्राण व्याकुल हो उठेंगे। ऐसे में जब हम व्याकुल होकर भजन कीर्तन करेंगे तो उसे भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं। ये व्रत का असली मतलब है।
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि व्रत का मतलब हमेशा कुछ खाते ही नहीं रहना है। व्रत का ये मतलब तो बिल्कुल भी नहीं है कि कुट्टू की पकौड़ी, समा के चावल की खीर, हलवा, साबूदाने की खीर खाओ…ये सब व्रत नहीं है। अगर 1 दिन कुछ नहीं खाया तो मर नहीं जाएंगे। व्रत में पानी पी सकते हैं और अगर 24 घंटे में ज्यादा इच्छा हुई तो कोई फल ले सकते हैं। ये स्वास्थ्य के लिहाज से भी सही है। उन्होंने आगे कहा कि व्रत में जानबूझकर भूखे और प्यासे रहकर भगवान की पूजा-अर्चना करना ही व्रत रखने का सही तरीका है।

















