लचर सरकारी व्यवस्थाओं के चलते शिक्षा के मंदिर में दफ़न हो गये सात मासूम क्या जिम्मेदार केवल शिक्षक ?

Seven innocent children were buried 
in the temple of education due to poor 
government arrangements

अपनी जान पर खेलकर पढ़ाने वाले शिक्षक निलंबित

शिक्षा मंत्री ने घटना की ज़िम्मेदारी ली,
लेकिन अब तक कोई मुआवज़ा देने की घोषणा नहीं

(अभय सिंह चौहान)

झालावाड़, 25 जुलाई /राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई है, और 28 बच्चे घायल हो गए हैं, जिनमें से 9 की हालत गंभीर है। शुक्रवार सुबह मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी सरकारी स्कूल की इमारत ढह गई, जिसमें 35 बच्चे दब गए। ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाकर बच्चों को निकाला और अस्पताल पहुँचाया।

मनोहरथाना हॉस्पिटल के अनुसार, 5 बच्चों की मौत मौके पर ही हो गई थी, और 2 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे को लेकर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सभी पक्ष विपक्ष के नेताओं ने दुख जताया है।

वहीं अपनी जान पर खेलकर पढ़ाने वाले पाँच शिक्षक निलंबित कर दिए गए हैं आरोप है कि चुना गिरते देखकर भी शिक्षकों ने उन्हें कमरों में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर किया और स्वयं बाहर चाय नाश्ता कर रहे थे तो क्या आलाधिकारियों ने भी उन शिक्षकों को उन्ही जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाने के लिए मजबूर नहीं किया होगा ?
क्या उनकी जान की कोई क़ीमत नहीं थी ?
यदि वहीं कोई शिक्षक बैठा होता और उसकी मौत हो जाती तो ,लेकिन शिक्षक की मौत पर उसे सरकारी सारी सुविधाएँ दी जाती ,लेकिन उन मासूमों के अभिभावकों को अब तक कोई सरकारी मुआवज़े की घोषणा नहीं होना सरकार के असंवेदनशील होने का एक ओर उदाहरण है !
उस स्कूल में जितने असुरक्षित बच्चे थे उतने ही असुरक्षित उनके शिक्षक भी थे लेकिन अपनी नौकरी की मजबूरी के चलते वे शिक्षक उस जर्जर स्कूल में पढ़ाई कराने को मजबूर थे ,लेकिन गाज गिरी तो उन्ही शिक्षकों पर, जबकि उनका काम इन जर्जर भवनों को ठीक कराने की सूचना उच्चाधिकारियों को देना था जो उन्होंने दी ,लेकिन उच्चाधिकारी घटना की जाँच के आदेश देकर बरी हो गए !
शिक्षा मंत्री ने इस घटना की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ली है यह एक बहुत साहसी क़दम है लेकिन आगे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने लिए कोई ठोस कार्रवाई जब तक उच्चाधिकारियों पर नहीं होगी ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी
इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अधिकतर आदिवासी और दलित परिवारों के हैं जिन्होंने अभी हाल ही के कुछ वर्षों में पढ़ाई की ओर रुख़ किया है उनके साथ यह घटना उनके आगामी अनुभवों के लिए घातक है, सरकारी स्कूलों की बदहाली उनकी शिक्षा में बाधक बनेगी !
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने भी विभाग के सभी स्कूलों के भवनों की पुनः जाँच के आदेश दे दिए हैं लेकिन इससे पहले भी इन्ही अव्यवस्थाओं के चलते अस्पतालों ,सरकारी भवनों में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी है आज भी कई सरकारी अस्पतालों ,सरकारी भवनों में भयावह दुर्घटना होने के बाद भी वही हालात है जबकि उन घटनाओं के भी उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए गए थे लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं सरकारी
स्कूल ,अस्पताल ,सड़कें ,पुल, भवनों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को सख़्त क़दम उठाने होंगे !
नहीं तो सरकारी अधिकारियों की लचर व्यवस्था वों के चलते हैं ऐसे ही मासूम अपनी जान से हाथ धोते रहेंगे !

abhay