एआई के बढ़ते प्रचलन में वैदिक ज्योतिष की महत्वता कायम : डॉ मनीष पांडे

“हम भाग्य विधाता तो नहीं, मगर एक मार्गदर्शक के रुप में व्यक्ति के मिटाते हैं दुख कष्ट”

आईवीएएफ की मलेशिया में ग्लोबल एस्ट्रोलॉजी एंड स्पिरिचुअल कन्वोकेशन संपन्न

मलेशिया। इंटरनेशनल वैदिक एस्ट्रोलॉजी फेडरेशन आईवीएएफ की श्री सुब्रमण्यम एस्ट्रोलॉजिकल एंड स्पिरिचुअल कन्वोकेशन का पांच दिवसीय कार्यक्रम मलेशिया में संपन्न हुआ। इस दौरान भारत देश के करीब एक दर्जन से अधिक राज्यों के ज्योतिर्विदों, आचार्यगण आदि ने शिरकत की। बतौर मुख्य अतिथि मलेशिया गवर्नमेंट टूरिज्म के मेंबर जो मरीनस तथा अध्यक्षता धर्मगुरु स्वामी ध्यान रहस्यजी ने की। कन्वोकेशन में अनेक ज्योतिषचार्यवृंद को ग्लोबल एस्ट्रोलॉजिकल अवार्ड मलेशिया–2025 एवं लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से नवाजा गया। मंत्रोच्चारण के साथ सामूहिक दीप रोशन से शुरु हुए इस कन्वोकेशन में ज्योतिष को वेदों का नेत्र बताते हुए जातक का श्रेष्ठ मार्गदर्शक बताया गया। आईवीएएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्या पिल्लई हरीश ने सभी का स्वागत किया। अतिथि जो मरीनस ने कहा, दक्षिण एशियाई देश मलेशिया जहां मुख्यत: इस्लामिक धर्म के लोग अधिक हैं, लेकिन सर्वधर्म समभाव भी यहां की विशेषता है। ऐसे में आईवीएएफ द्वारा सनातन परंपरा एवं ज्योतिष की पताका यहां से अलग ही संदेश लेकर जाएगी। वहीं स्वामी ध्यान रहस्यजी ने कहा कि पूरे ब्रह्माण्ड में ज्योतिष विज्ञान है तथा व्यक्ति का जीवन इसी में समाहित है।
इस दौरान मुख्य वक्ता अंतराष्ट्रीय एस्ट्रो स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट डॉ मनीष पांडे ने डिजिटल डिसप्ले प्रेजेंटेशन के माध्यम से ईकिगाई से आत्म धर्म को विस्तार से परिभाषित किया। पाथ और सनातन धर्म के तहत धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के साथ उन्होंने भाग्य को जोड़ते हुए ज्योतिषी को अपनी विद्याध्ययन के माध्यम से श्रेष्ठ मार्गदर्शन एवं ब्लेसिंग देने वाला इस धरा का मुख्य पात्र भी बताया। उन्होंने कहा कि एक ज्योतिषी की वैदिक ज्ञान रूपी विद्या ही उसका धर्म है। साथ ही डॉ मनीष पांडे ने हर क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रचलन को चिंतनीय विषय बताते हुए कहा आने वाला समय बेहद प्रतिस्पर्धी युग होगा। वे बोले कि हमारे वेद, पुराण एवं सर्वथा पुरातन सनातन परंपरा का कोई सानी नहीं है। हमारे ही वैदिक रूपी साइंस ज्ञान को ही विश्व स्तर पर विद्वजनों द्वारा विभिन्न रूपों में प्रस्तुतकर वाहवाही ली जा रही है। इससे पूर्व गुजरात के सौराष्ट्र से मास्टर ऑफ साउंड हीलिंग डॉ नरेंद्र भैसदादिया ने साउंड हीलिंग की प्रस्तुति को ज्योतिष, सकारात्मक ऊर्जा इत्यादि में अहम बताया। ज्योतिर्विद विज्ञान संस्थान पटना के निदेशक डॉ राजनाथ झा ने कुर्मचक्र से भूकंप, सुनामी सहित प्राकृतिक आपदाओं की समय से पूर्व भविष्यवाणियों का विवेचन करते हुए कहा कि सूर्योदय एवं चंद्रोदय आदि की समयानुकूल गति ही ज्योतिष विद्या का प्रत्यक्ष प्रमाण है। फेडरेशन के उड़ीसा राज्य के चेयरपर्सन डॉ मनोज लेंका ने भारतीय ज्योतिष एवं गणितीय गणना का वैश्विक पटल से पुनः नई एनर्जी के रूप में परिवर्तित होकर विस्तारित होने पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, व्यक्ति का भाग्य कर्म के माध्यम से ही परिवर्तित तथा प्रारब्ध के रूप में कटता है। व्यक्ति की दिक्कतों, परेशानियों की विभिन्न प्रकार के क्रूर ग्रहों के साथ दुख कष्टों को एक सच्चा विद्वान ज्योतिषी ही सकारात्मक राह दिखाकर समय व्यतीत कराते हैं। जयपुर के एस्ट्रोलॉजर एडवोकेट डॉ पंडित पवन शर्मा ने 12 भाव एवं नौ ग्रहों की चाल को एकजुट परिवार में समन्वयता से बैलेंस होने वाला बताया। पंडित शर्मा ने अंतरात्मा से स्वयं खुश रहने और दूसरों के साथ खुशी बांटने की प्रेरणा देते हुए कहा व्यक्ति की लाइफ स्टाइल ही ब्रह्मांड की एनर्जी है। मालेगांव महाराष्ट्र की साइकैटरिस्ट काउंसलर श्रीमती सुधा ने स्मेल थेरेपी हीलिंग अरोमा थेरेपी से ज्योतिष एवं साइकोलॉजी के गहरे संबंध का विश्लेषण किया। फेडरेशन की इंटरनेशनल ब्रैंड एंबेसडर सोहनी शास्त्री फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित इस कॉन्फ्रेंस में गुना एमपी के ज्योतिर्विद युवराज राजोरिया, वैदिक वास्तुविद एक्सपर्ट डॉ तारक उपाध्याय, केरल के डॉ दिवाकरन, जबलपुर के सीनियर एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मण दहिया, असम के मिथुन भट्टाचार्जी, जेपी परीदा, गुजरात की रमन साइंस एक्सपर्ट जयश्री ओझा, टेरो रीडर डॉ सुचिस्मिता प्रधान, श्रीमती मीनाक्षी, एस्ट्रोलॉजर श्रीपति आचार्य, पलजीत सिंह, डॉ आकाश भट्ट, डॉ वीएम सोमसुंदरण ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए। सभी का आभार यूथ एस्ट्रोलॉजर इंद्रप्रीत कौर ने व्यक्त किया।

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