सांगानेर में हुआ दिव्य राम कथा का भव्य आयोजन
रामायण केवल कथा नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और समाज के लिए आदर्श जीवन पथ-पंकज ओझा
सांगानेर (जयपुर)। सांगानेर स्थित न्यू सन ब्राइट स्कूल का वातावरण आज भक्ति, श्रद्धा और दिव्यता से सराबोर हो गया, जब यहाँ एक अद्वितीय और प्रेरणादायी राम कथा महोत्सव का आयोजन हुआ। धर्म ध्वजावाहक एवं आध्यात्मिक प्रेरक पंकज ओझा (RAS) ने अपने ओजस्वी वचनों और गहन कथा-वाचन से उपस्थित जनसमूह को न केवल मंत्रमुग्ध किया बल्कि उनके हृदयों को भक्ति और धर्ममय जीवन की ओर प्रेरित भी किया।
इस कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी मुकेश शर्मा, मदन शर्मा, कृष्ण शर्मा, जयप्रकाश शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुजनों के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, गणमान्य नागरिक, धर्मप्रेमी, महिला मंडल और युवा वर्ग ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी सफल और पावन बना दिया।
कथा वाचक पंकज ओझा ने अपने दिव्य वचनों से भगवान श्रीराम और भरत के अतुलनीय प्रेम की कथा, निषादराज की निष्कपट भक्ति, महादेव की प्रभु श्रीराम में अटूट आस्था, मनु-सतरूपा की अद्भुत गाथा, विश्वामित्र के तप और चरित्र की महिमा, अहिल्या जी की मुक्ति कथा, महाराज दशरथ का राम के प्रति अटूट स्नेह तथा जनक दरबार में प्रभु श्रीराम द्वारा धनुष भंजन का ऐतिहासिक प्रसंग सुनाया।
उन्होंने आगे राधा रानी अष्टमी के पावन अवसर का महत्व बताते हुए राधारानी के दिव्य प्रेम और भक्ति की गाथा का भी भावनात्मक वर्णन किया। इन सब प्रसंगों का ऐसा अनूठा, प्रेरक और मार्मिक चित्रण उन्होंने प्रस्तुत किया कि उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो उठीं और हृदय आनंद व भक्ति से परिपूर्ण हो गए।
अपने प्रवचनों के माध्यम से पंकज ओझा ने स्पष्ट किया कि—
सनातन धर्म कोई मात्र परंपरा नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला और आधार है।
रामायण केवल कथा नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और समाज के लिए आदर्श जीवन पथ है।
जब व्यक्ति धर्म और अध्यात्म की ओर अग्रसर होता है, तभी समाज में प्रेम, एकता और संस्कारों का प्रसार होता है।
उन्होंने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज की पीढ़ी यदि श्रीराम और राधारानी के आदर्शों को आत्मसात कर ले, तो उनका जीवन न केवल सफल होगा बल्कि समाज भी धर्ममय, संस्कारित और समृद्ध बन सकेगा।
श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन ही समाज में आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का संचार करते हैं। इनसे न केवल धर्मप्रेम जागृत होता है बल्कि जीवन में सद्गुण, संयम और संस्कारों की भी स्थापना होती है।
कार्यक्रम का समापन गगनभेदी “जय श्रीराम” और “राधे-राधे” के उद्घोषों, भक्तिमय गीतों और प्रभु श्रीराम-राधारानी के चरणों में आस्था अर्पित करते हुए हुआ। संपूर्ण वातावरण भक्ति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
अंत में सभी श्रद्धालुओं ने यह संकल्प लिया कि श्रीराम के आदर्शों और राधा रानी की भक्ति को जीवन में उतारकर ही सच्चा धर्ममय और सफल जीवन जिया जा सकता है।

















