7 सितम्बर 2025
सनातन धर्म और शास्त्रों में चंद्रग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से साधना, आत्मशुद्धि व पितृ तृप्ति का अद्भुत अवसर माना गया है। इस बार का ग्रहण पितृ पक्ष में आने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है.
चंद्रग्रहण का शास्त्रीय महत्व
धार्मिक दृष्टि: ग्रहण काल अशुभ व बाधांक काल है—मांगलिक कार्य, पूजन, भोजन आदि निषिद्ध रहते हैं, मंदिरों के पट बंद रहते हैं।
आध्यात्मिक लाभ: ग्रहण के दौरान मंत्र-जप, साधना, स्नान पश्चात दान पुण्य आदि सामान्य दिनों से करोड़ों गुना अधिक फलदायी माने गए हैं।
पितृ पक्ष: श्राद्धपक्ष में ग्रहण पितरों की तृप्ति, शांति और कृपा के लिए अत्यंत श्रेष्ठ अवसर है.
चंद्रग्रहण में जप और लाभ (शास्त्र अनुसार)
शिव पुराण के अनुसार:
“ग्रहण-काल में किया गया एक मंत्र-जप, सामान्य दिनों के एक करोड़ जप के बराबर फल देता है!”
स्कंद पुराण, गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मुहूर्त चिंतामणि आदि के अनुसार:
ग्रहण-स्नान तथा मंत्र-जप से महापुण्य, पापों की शांति, मानसिक शुद्धि, ग्रह-बाधा व संकटों का समूल नाश, सभी देवों का विशेष अनुग्रह तथा पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
कुछ पुराणों के अनुसार जप का फल 7 लाख, 10 लाख, करोड़ गुना या अधिक तक बताया गया है (शिव पुराण में सर्वाधिक फल).
ग्रहण काल में किया गया दान, तर्पण, ध्यान एवं साधना भी लाखों-करोड़ों गुना फलदायी माना गया.
जप, पाठ एवं प्रमुख मंत्र-
“ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”
“ॐ सोमाय नमः”
“ॐ नमः शिवाय”
“ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नमः”
“ॐ विभांशु अमृतांशु नमः” (कुंडली के कष्ट दूर करने हेतु)
साथ में–
चंद्र स्तोत्र, शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र
गुरु मंत्र, भगवद्गीता, सत्यनारायण कथा
का पाठ भी परम शुभकर है.
सावधानियाँ एवं निषेध (सूतक काल नियम)
सूतक काल (ग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पूर्व–इस बार 7 सितम्बर दोपहर 12:57 PM से).
मांगलिक कार्य, भोजन, पूजन वर्जित
मूर्ति स्पर्श, मंदिर प्रवेश, यात्रा, विवाद, शयन वर्जित
गर्भवती महिलाओं को ख़ास सतर्कता; धारदार वस्तु न काटें, ग्रहण न देखें, बाहर न निकलें।
पूर्व-निर्मित भोजन में तुलसी दल डालें या कुश डालें।
इस दिन किसी भी शुभ कार्य से परहेज करें।
ग्रहण समापन (1:26 AM, 8 सितम्बर) के बाद स्नान, शुद्धि, और फिर पूजा-अर्चना करें.
पाठ, पूजा एवं पुनीत कर्म
चंद्र या शिव संबंधित मंत्र, चंद्र स्तोत्र, शिव चालीसा, महामृत्युंजय अथवा अपने इष्ट-मंत्र का जप करें।
पितरों के लिए तर्पण, दान, सत्यनारायण पूजा अवश्य करें
पूर्णिमा व्रत का पालन और सत्यनारायण कथा स्नान-दान साथ करें
ग्रहण समय-सारणी (IST, भारत):-
सूतक प्रारंभ: 7 सितम्बर, 12:57 PM
ग्रहण आरंभ: 7 सितम्बर, 9:58 PM
चरम: 7 सितम्बर, 11:42 PM
ग्रहण समाप्ति: 8 सितम्बर, 1:26 AM
सूतक काल
सूतक प्रारंभ: 7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे से
सूतक समाप्ति: 8 सितंबर, 1:26 बजे सुबह तक
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्धि करनी चाहिए और फिर पूजा-आरती आरंभ करनी चाहिए।
यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसके प्रभाव के कारण सूतक काल का पालन अत्यंत आवश्यक है। भक्तों को सूतक काल के नियमों का ध्यान रखते हुए आध्यात्मिक साधना में लगना चाहिए और ग्रहण समाप्ति पर स्नान-दान तथा शुद्धि कर्मों का संपादन करना चाहिए.
चंद्रग्रहण आत्मशुद्धि, साधना, तर्पण और मंत्र शक्ति के करोड़ गुना फल का विलक्षण अवसर है।
शिव पुराण अनुरूप एक जप का “एक करोड़” जप जितना फल, शास्त्रों द्वारा समर्थित।
शुद्धि, ध्यान, सावधानी, सतर्कता व श्रद्धा से इस समय का पूर्ण लाभ प्राप्त करें!
पंकज ओझा
RAS
आध्यात्मिक प्रेरक एवं धर्म ध्वजावाहक.

















