शिक्षक का अंतिम पाठ , 88 वर्ष की उम्र में देहदान कर गए राजाराम जी पंवार

 शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित था जीवन

लखन ठाकुर की रिपोर्ट

​मंडलेश्वर के पूर्व व्याख्याता (Lecturer) और प्रिंसिपल ने जीती जागती मिसाल पेश की। कई साल पहले भरी थी देहदान की इच्छा, इंदौर में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर।

​मंडलेश्वर। शिक्षा और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित जीवन जीने वाले राजाराम जी पंवार (88) का रविवार दिनांक 16 नवंबर 2025 को स्वर्गवास हो गया। उन्होंने देह त्याग के बाद भी समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाई और अपनी वर्षों पुरानी इच्छा के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर रविवार दोपहर 2 बजे इंदौर में देहदान कर दिया गया।
श्री ​पंवार, जो गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, मंडलेश्वर में कई वर्षों तक व्याख्याता (Lecturer) रहे और उमिया पाटीदार स्कूल, मंडलेश्वर में प्रिंसिपल के रूप में सेवा दी, एक असाधारण शिक्षक थे।
*​हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत के ज्ञाता और निःशुल्क ट्यूशन*
​राजाराम जी पंवार की पहचान केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि एक विद्वान की थी। वे हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं के गहरे ज्ञाता थे। उनके पुराने छात्रों और सहकर्मियों के अनुसार, उन्होंने कई वर्षों तक जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन दिया, जिससे अनगिनत छात्रों का भविष्य संवरा। शिक्षा के प्रति उनका यह समर्पण उनके व्यक्तित्व का सबसे प्रेरक पहलू था।
*​देहदान: इच्छा का सम्मान और अंतिम विदाई*
​परिवार के देवेंद्र पंवार और शैलेंद्र पंवार ने बताया कि श्री पंवार ने कई वर्ष पहले ही देहदान का फॉर्म भर दिया था। उनकी इस नेक इच्छा का सम्मान करते हुए, पार्थिव शरीर को देहदान के लिए सौंपा गया। इंदौर स्थित 301, देवाशीष अपार्टमेंट, मनोरमगंज स्थित निवास स्थान से पार्थिव देहदान के समय उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
​यह देहदान यह दर्शाता है कि राजाराम जी ने जीवन भर समाज को ज्ञान दिया और देह त्याग के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा विज्ञान के काम आएगा।
पंवार की पारिवारिक पृष्ठभूमि*
​राजाराम जी पंवार, स्वर्गीय लक्ष्मण जी के छोटे भाई तथा स्वर्गीय हीरालाल जी पंवार, स्वर्गीय मंशाराम जी पंवार और गंगाराम जी पंवार के बड़े भाई थे। उनका निधन शिक्षा जगत और मंडलेश्वर के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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