15 जुलाई से प्राइवेट हॉस्पिटल आरजीएचएस और पीडब्ल्यूडी में ठेकेदार कार्य बंद की चेतावनी देकर बना रहे सरकार पर दबाव ?

Are contractors creating pressure on 
the government by threatening to 
stop work in private hospitals, 
RGHS and PWD from July 15?

*निजी अस्पताल कर रहे ओपीडी सेवाओं और फार्मेसी में विशेष रूप से पुनर्भरण आधारित मॉडल लागू करने की माँग*

*पीडब्लूडी के ठेकेदारों द्वारा दोष निवारण की अवधि को पाँच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने की माँग*

*राज्य में कैशलेस इलाज के लिए तीन एजेंसियां कर रही है काम*

*अभय सिंह चौहान*

निजी अस्पतालों की यूनियन राजस्थान एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स ने 15 जुलाई से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत इलाज बंद करने की घोषणा की है, उधर सार्वजनिक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने माँगें नहीं मानने पर 15 जुलाई से प्रदेशभर में चल रहे कार्यों को बंद करने का ऐलान किया है !
हालाँकि निजी अस्पताल मालिक व सार्वजनिक निर्माण विभाग में पंजीकृत ठेकेदार अपनी विभिन्न माँगो को लेकर कई बार सरकार को ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन अचानक एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर पंद्रह जुलाई से कार्य बंद करने की धमकी देना सरकार पर दबाव बनाने की एक रणनीति हो सकती है क्योंकि दोनों ही विभाग जनता से जुड़े सीधे विभाग है जहाँ एक ओर बरसात में मौसमी बीमारी और अन्य शारीरिक समस्याएं ज़्यादा रहती है वहीं दूसरी ओर बरसात में सड़क ,पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले ज़्यादा होते हैं ऐसे में इस समय कार्यों को रोकना आम जनता को भारी पड़ सकता है,निजी अस्पताल तो सीधे तौर पर ओपीडी सेवाओं और फार्मेसी में विशेष रूप से पुनर्भरण आधारित मॉडल लागू करने की माँग कर रहा है वहीं दूसरी ओर पीडब्लूडी के ठेकेदार दोष निवारण की अवधि को पाँच वर्ष से घटाकर एक साल करने की माँग कर रहा है जो एक तरह से सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश मानी जा सकती है !
इन समस्याओं का सही समय पर समाधान नहीं निकाला तो लाखों लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो सकते हैं,यदि कैशलैस इलाज बंद हुआ तो इस योजना का कोई महत्व नहीं रह जाएगा !
आरजीएचएस कैशलैस सुविधा बंद करना कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों पर सीधा हमला होगा !
हर महीने कर्मचारियों के वेतन से आरजीएचएस के लिए राशि काटी जाती है, लेकिन अस्पतालों को भुगतान नहीं हो रहा तो यह विभाग के अधिकारियों इस सीधे तौर पर लापरवाही है या सरकार को बदनाम करने की साज़िश ?
यह वित्तीय संकट ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है ,सरकार पिछले सात महीनों से 980 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं कर पाई, जिससे 701 निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान अटका हुआ है।

*9 ज्ञापन देने के बावजूद माँगो का कोई समाधान नहीं*

निजी अस्पताल संगठनों का कहना है कि अस्पताल प्रतिनिधियों की ओर से 9 मई से अब तक 9 ज्ञापन राजस्थान वित्त मंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा सचिव, वित्त सचिव बजट, वित्त सचिव व्यय, स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आरजीएचएस की परियोजना निदेशक को देने के बावजद भी अस्पतालों की जायज मांगों का कोई समाधान आज तक नही किया गया है।

*चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर*

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के अनुसार चिकित्सा विभाग को एक महीने पहले ही यह योजना सौंपी गई है,विभाग योजना की समीक्षा कर रहा है,निजी अस्पतालों की ओर से योजना बंद करने की हमारे पास कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है।
ग़ौरतलब है कि राजस्थान में केंद्र व राज्य कर्मचारियों सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों का मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना ,राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना(सीजीएचएस) योजना के तहत इलाज होता है ,जिसमें आरजीएचएस का कार्य अभी हाल ही में स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया है
यूनियन राजस्थान एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स ने आरजीएचएस को बंद करने का ऐलान किया है। साथ ही कहा है कि कर्मचारी आरजीएचएस की दरों पर भुगतान करके निजी अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं !

abhay