वेव्स ओटीटी भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों को नई पहचान दे रहा है– मदन राठौड़

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“प्रधानमंत्री मोदी का यह डिजिटल मंच ‘सबका साथ, सबका विकास’ का जीवंत उदाहरण है, जो भारत की सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त कर रहा है” – मदन राठौड़
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“दूरदर्शन और आकाशवाणी की ताकत से वेव्स ओटीटी देश के हर कोने तक क्षेत्रीय सामग्री पहुंचा रहा है” – मदन राठौड़
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“ग्रामीण से लेकर शहरों तक, वेव्स ओटीटी भारतीय परंपराओं और आधुनिक तकनीक का संगम है” – मदन राठौड़
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जयपुर ,13 अगस्त 2025 — राजस्थान से राज्यसभा सांसद श्री मदन राठौड़ द्वारा संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में सूचना और प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठा रही है। वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म को भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय संस्कृतियों का सशक्त मंच बनाने के लिए सरकार ने व्यापक साझेदारियां की हैं। कंटेंट क्रिएटर्स, क्षेत्रीय प्रसारकों और सांस्कृतिक संस्थानों के नेटवर्क के साथ मिलकर यह प्लेटफॉर्म अनेक भाषाओं और बोलियों में समृद्ध सामग्री उपलब्ध करा रहा है, साथ ही उप-शीर्षक और मेटाडाटा संबंधन के माध्यम से इसे देश के हर कोने तक सुलभ बना रहा है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि वेव्स ओटीटी आकाशवाणी और दूरदर्शन की क्षेत्रीय सामग्री क्षमताओं का भी लाभ उठा रहा है। दूरदर्शन के सभी 35 सैटेलाइट चैनल और आकाशवाणी के विभिन्न क्षेत्रीय चैनल, साथ ही अनेक फ्री-टू-एयर प्रसारणकर्ता इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। यह एक फ्री-टू-एक्सेस डिजिटल मंच है, जो स्मार्टफोन और इंटरनेट-सक्षम उपकरणों पर कहीं भी, कभी भी पहुंच प्रदान करता है। समाचार, सामयिक घटनाएं, लोकसेवा कार्यक्रम, राष्ट्रीय विरासत, क्षेत्रीय विविधता, लोककला, संगीत और खेल आयोजनों के साथ-साथ मनोरंजन सामग्री – सब कुछ यहां निःशुल्क उपलब्ध है।
सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री मोदी सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना का सशक्त उदाहरण है, जो न केवल भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों को संरक्षित करता है बल्कि उन्हें डिजिटल युग में नई पहचान भी देता है। निजी ओटीटी प्लेटफॉर्मों के व्यावसायिक मॉडल से अलग, वेव्स ओटीटी पूरी तरह लोकसेवा-केंद्रित है और दर्शकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए उपयोगकर्ता-मित्र सुविधाओं को एकीकृत किया गया है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इसे लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष लोकसंपर्क प्रयास किए जा रहे हैं। आकाशवाणी, दूरदर्शन और MyGov प्लेटफॉर्म के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में लक्षित सोशल मीडिया अभियानों द्वारा इसकी पहुंच निरंतर बढ़ रही है। प्रसार भारती ने ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) के साथ साझेदारी कर इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम शुरू किया है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह पहल भारत की भाषाई और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसमें सांसद मदन राठौड़ की सक्रिय भूमिका प्रशंसनीय है। यह डिजिटल भारत के विज़न को साकार करने के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता को भी सुदृढ़ कर रहा है।

abhay