उनसे इलाज बंद नहीं करने का भरवाना चाहिए बाँड
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देशानुसार राज्य सरकार राजस्थान गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम के सुदृढ़ीकरण एवं सुचारू संचालन की दिशा में निरंतर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और योजना में जरूरी बदलाव भी किए जा रहे हैं ताकि लाभार्थियों को इस योजना का पूरा लाभ सुगमता से मिले और योजना में किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी एवं अनियमितता की गुंजाइश नहीं रहे,लेकिन सरकार को चाहिये कि योजना में एम्पेंल्ड अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए योजना में एम्पेनल हेतु विचाराधीन अस्पतालों को जल्द से जल्द शामिल कर उनसे किसी भी परिस्थिति में इलाज बंद नहीं करवाने का बॉण्ड भरवाया जाए !
साथ ही योजना में रही खामियों को दूर कर इसे और बेहतर बनाया जाये, गडबडियों की जांच व अनियमितताओं के विरूद्ध समय पर कार्यवाही की जाये ताकि निजी अस्पतालों के अनुचित दबाव को खत्म किया जा सके और ऐसे अस्पतालों का चिन्हीकरण कर उनके विरूद्व सख्त एक्शन लिया जा सके ।
साथ ही सेवाएं देने से मना करने वाले अस्पतालों के खिलाफ एमओयू के नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाय नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की आरजीएचएस योजना से संबद्धता निरस्त करने जैसे कदम भी उठाने चाहिए !
*भ्रम फैलाने वाले अस्पतालों पर होगी सख्त कार्रवाई-गजेन्द्र सिंह खींवसर
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि योजना कुछ ऐसे अस्पताल जिन्होंने योजना में अनियमितताएं की हैं और उनकी जांच एवं आडिट चल रही है, वे अनुचित दबाव बनाकर भुगतान प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं और योजना के संचालन को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे अस्पतालों का चिन्हीकरण कर उनके विरूद्व सख्त एक्शन लिया जाएगा।
खींवसर ने कहा कि ज्यादातर अस्पताल योजना की प्रक्रिया और संचालन तथा योजना में किये जा रहे सुधारों की कार्यवाही से संतुष्ट हैं। आमतौर पर योजना में प्रतिदिन औसतन 520 अस्पताल संचालित होते हैं। दिनांक 25 व 26 अगस्त 2025 को 350-400 निजी अस्पतालों द्वारा योजनान्तर्गत रोगियों को सेवायें प्रदान की है। इनमें निजी मेडीकल कॉलेज से जुडे समस्त अस्पताल तथा संभाग व जिला स्तर पर संचालित प्रमुख मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल शामिल हैं। सेवाएं देने से मना करने वाले अस्पतालों के खिलाफ एमओयू के नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की आरजीएचएस योजना से संबद्धता निरस्त करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अप्रेल माह से लेकर अब तक आरजीएचएस में अनुमोदित चिकित्सालयों को लगभग 850 करोड़ रूपये का भुगतान आईपीडी, डेकेयर एवं ओपीडी के दावों के विरूद्ध किया जा चुका है। मार्च, 2025 से पहले की अवधि के अधिकांश दावों के भुगतान उन अस्पतालों के बकाया हैं, जिनके खिलाफ अनियमितताएं पाई गई थीं और जिनके सबंध में विभिन्न स्तरों पर जांच, ऑडिट या परीक्षण की कार्यवाही विचाराधीन है। ऐसे 53 अस्पतालों की आईडी वर्तमान में निलंबित है। योजना में अनुमोदित अस्पतालों से संबंधित आईपीडी, ओपीडी, डेकेयर एवं फार्मेसी के 196 करोड़ रूपए के दावे पारित होकर भुगतान की प्रक्रिया में हैं।

















