गारमेंट्स एवं टेक्सटाइल्स उद्योग ने आंशिक जीएसटी राहत का स्वागत किया, परन्तु एक समान कर संरचना की मांग की

खागा के पूर्व अध्यक्ष एवं अध्यक्ष कराधान समिति सज्जन राज मेहता ने पीएम मोदी को ट्वीट कर लिखा शीघ्र समाधान हेतु लगाई गुहार

बेंगलूरु। गारमेंट्स एवं टेक्सटाइल्स उद्योग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जीएसटी कौंसिल के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने ₹2500 तक के कपड़ों (पहले ₹999 तक सीमित) पर जीएसटी को घटाकर 5% करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। यह कदम एक सकारात्मक सुधार है , जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा और उद्योग को राहत मिलेगी। साथ ही, हम ₹2500 से अधिक मूल्य के कपड़ों पर 18% जीएसटी लगाने के निर्णय पर अपनी चिंता व्यक्त करना चाहते हैं। कर्नाटका होज़री एंड गारमेंट एसोसिएशन (खागा) बेंगलूरु के पूर्व अध्यक्ष एवं अध्यक्ष कराधान समिति सज्जन राज मेहता ने बताया कि इससे पहले की तुलना में कर का बोझ 6% बढ़ जाता है, जिससे ऐसे कपड़े समाज के सभी वर्गों के लिए – चाहे उनकी जाति, वर्ग या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, अधिक महंगे हो जाते हैं। एक ही वस्तु के लिए दोहरी कर प्रणाली अनुपालन को जटिल बनाएगी, बाजार को विकृत करेगी और इंस्पेक्टर राज के फिर से उभरने का जोखिम पैदा करेगी। बकौल मेहता हम कई घरेलू आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दरों में सामान्य कमी का स्वागत करते हैं, जो सरकार के सुधारवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। हालाँकि, हम आग्रह करते हैं कि “एक वस्तु – एक जीएसटी दर” के सिद्धांत को अपनाकर, निष्पक्षता, सरलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए, वस्त्र और कपड़ा क्षेत्र में भी इसी तरह की तर्कसंगतता लागू की जाए। मेहता ने कहा कि हम यह भी ध्यान देते हैं कि पेट्रोल और डीज़ल जीएसटी से बाहर हैं, और उन्हें जीएसटी ढांचे में शामिल करने से उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों को अत्यंत आवश्यक एकरूपता और राहत मिलेगी। ट्रेड एक्टिविस्ट मेहता के मुताबिक वस्त्र और कपड़ा उद्योग ऐसे सुधारों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है जो कराधान को सरल बनाते हैं, आम आदमी के लिए लागत कम करते हैं और भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मज़बूत बनाते हैं।

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