बार एक ही जगह खड्डे ,जर्जर स्कूलों के हालात खोल रहे प्रशासन की पोल !
(अभय सिंह चौहान)
सरकारी स्कूलों की बदहाली और मासूम बच्चों पर मंडरा रहे खतरे की खबरों के साथ ही राजस्थान में मानसून भी जमकर मेहरबान है ,सरकारी सिस्टम के चलते हैं शहरों की सड़कों पर हुए खड्डे सिस्टम को आईना दिखा रहे हैं ,इस सरकारी सिस्टम को लेकर राजस्थान सरकार को हाईकोर्ट ने सख़्त लहजे़ में कहा है कि टूटी सड़कें जयपुर की प्रतिष्ठा ख़राब कर रही है लेकिन हालात जयपुर ही नहीं पूरे राजस्थान के ख़राब है मुख्यमंत्री बुधवार शाम जायज़ा लेने निकले तो सही लेकिन मात्र जायज़ा लेने और अधिकारियों को निर्देशित करने से काम चलने वाला नहीं है ,सरकार के मंत्रियों-विधायकों का प्रदेशभर में दौरा कर वहां रात्रि विश्राम का कार्यक्रम तय किया जाना चाहिए, और ऐसा शीघ्र ही इस मानसून सीजन में किया जाए ताकि जनप्रतिनिधि स्थिति की गंभीरता और संभावित खतरों को अच्छी तरह समझ सकें,मुख्यमंत्री स्वयं इसकी शुरुआत कर चुके हैं ,
क्योंकि सिस्टम बिगाड़ने वाले अधिकारियों का काम तो जनता के दिए टैक्स के पैसे को बजट के नाम पर लूटना है ये सिस्टम इन्हीं का तो बनाया गया है जो हर साल बजट का दुरूपयोग कर मासूम जनता के विश्वास का गला घोटते हैं !
राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी भाजपा सरकार के कामकाज और कार्यशैली पर करारा तमाचा है।
जब न्यायपालिका को सड़क, पानी और ट्रैफिक जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं के लिए सरकार को कड़े शब्दों में चेताना पड़े, तो यह सिस्टम की नाकामी का स्पष्ट संदेश देता है।
इस सिस्टम को बनाने वालों ने विकास की जगह प्रदेश को बारिश में बहता सिस्टम दिया ,जलभराव, टूटी सड़कें, ट्रैफिक जाम और खस्ताहाल सिस्टम प्रदेश की गौरवशाली प्रतिष्ठा एवं साख पर बट्टा लगा रहा है।
राजधानी जयपुर में पिछले दिनों की बारिश ने नगर निगम और जेडीए के अधिकारियों के कामों का ऐसा नमूना पेश किया है की गूगल मैप्स को भी रास्ता बताने में परेशानी हो रही है , उधर सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों में हो रही घटनाओं में बच्चों के मारे जाने की ख़बरें आने के बावजूद प्रशासन अब तक गंभीर नहीं हुआ है ,
दरअसल राजस्थान में बीते दिनों से हुई लगातार बारिश ने शहरों की सड़कों की हालत बद से बदतर कर दी है,पानी उतरते ही शहरों की सड़कों की असल तस्वीर सामने आ जाती है जगह-जगह उधड़ी परतें, उखड़े रास्ते और गहरे गड्ढे नगर निगम और जेडीए की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं,कहीं अस्थायी रूप से ग्रेवल डाली जा रही है, तो कहीं सीमेंटेड रोड बनाकर मरम्मत का दिखावा कर सरकारी रुपयों का दुरुपयोग किया जा रहा है जलनिकासी की व्यवस्थाएं भी फेल साबित हो रही हैं। चार दिन पूर्व हुई बारिश में गड्ढे भरने के लिए जो काम किए आज की बारिश ने सारे इंतज़ाम फेल कर दिए है अब फिर बजट का दुरुपयोग कर खानापूर्ति की जाएगी लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया क्योंकि इस बजट से ही तो सिस्टम चल रहा है !

















