निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए सरकार को करना होगा अपना ढांचा मज़बूत !

To stop the arbitrariness of private 
hospitals, the government will have to 
strengthen its structure!

*फ़िलहाल निजी अस्पताल जारी रखेंगे RGHS के तहत कैशलेस इलाज*

राइट टू हेल्थ विधेयक को अमली जामा पहनाना होगा

(अभय सिंह चौहान)

सोमवार को हुई चिकित्सा विभाग और राजस्थान अलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशन (आरएएचए) के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर सहमति बनी,जिसमें राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज पहले की तरह मिलता रहेगा।
साथ ही निजी अस्पतालों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जो आगे राय लेकर सरकार से कमियां दूर कराने का काम करेगी। सरकार द्वारा यह लिखित में देने
के बाद निजी अस्पतालों ने इलाज जारी करने का निर्णय लिया।

समझौते के बाद निजी अस्पतालों द्वारा 15 जुलाई से आरजीएचएस योजना के तहत इलाज बंद करने की चेतावनी को भी वापस ले लिया गया है, बैठक में निजी अस्पतालों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनी, जिसमें 31 मार्च, 2025 तक के बकाया भुगतान को 31 जुलाई तक जारी करने और भविष्य में 60 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का आश्वासन शामिल है,साथ ही क्लेम अप्रूवल प्रक्रिया को तेज करने के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) की संख्या को एक से बढ़ाकर चार करने का निर्णय लिया गया।

ब्लॉक किए गए अस्पतालों को पुनः शुरू करने का आश्वासन  ?

इसके अलावा जिन अस्पतालों को ब्लॉक किया गया है, उन्हें बुलाकर समस्या दूर कर पुनः शुरू करने पर सहमति बनी, ब्लॉक किए गए अस्पतालों को पुनः शुरू करने की सहमति इस बैठक में दे कर विभाग के अधिकारियों ने सरकार को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 15 जुलाई को काम बंद करने का एक अख़बार में विज्ञापन इन्हीं ब्लॉक किए गए अस्पतालों के मालिकों द्वारा दिया गया था ,क्या गारंटी है कि ब्लॉक किए गए अस्पताल अब द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होंगे इन पर भी सख़्त क़दम उठाए जाने की आवश्यकता है !
आरजीएचएस में व्याप्त भ्रष्टाचार को तत्काल दूर करने की जरूरत है,योजना में अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों व अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए,योजना को बंद और फेल करने की साजिश के जिम्मेदार अधिकारियों और भ्रष्ट अस्पतालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिये जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई रुकावट न आए इसके लिए सरकार को ख़ुद का एक मज़बूत ढांचा तैयार करना होगा ताकि निजी अस्पतालों की मनमानी को रोका जा सके !
जिन अस्पतालों में अनियमितताएं की सूचना मिले उनकी जाँच कर नियमानुसार कार्रवाई की जावे ,भ्रष्टाचार की शिकायतों पर त्वरित कदम उठाए जाएं। अस्पतालों का भुगतान समय पर देने का आश्वासन तो सरकार द्वारा दे दिया गया है लेकिन साथ ही निजी अस्पतालों से भी अनावश्यक शुल्क न वसूलने का निजी अस्पतालों से आश्वासन लेना चाहिए ,आरजीएचएस के तहत लाभार्थियों को सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है, जिसमें मंत्रियों, विधायकों, सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रित शामिल हैं, लेकिन निजी अस्पतालों और सरकार में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से इस योजना के क्रियान्वयन पर कोई संकट खड़ा नहीं हो ,जितनी आवश्यकता सरकार को RGHS के माध्यम से एक आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराए जाने की है उससे कहीं अधिक निजी अस्पतालों को इस योजना की आवश्यकता है क्योंकि कई अस्पतालों का तो ख़र्चा ही इस स्कीम से चल रहा है ! क्योंकि फ़िलहाल तो निजी अस्पतालों ने कम बंद करने की चेतावनी देकर अपने सारे बकाया वसूली सहित ब्लॉक किए गए अस्पतालों को भी पुनः शुरू करने का दबाव बनाकर काम शुरू कर दिया है लेकिन आगे यदि इसी तरह सरकार इनके दबाव के आगे झुकते रही तो यह निजी अस्पताल आम जनता के लिए नासूर बन सकते हैं, सरकार को इन्हें राइट टू हेल्थ के दायरे में लाकर का काम करवाना होगा !

abhay