जिनके चुनाव को देश की न्याय पालिका ने किया रद्द, उनके लोग आज देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाने का कर रहे है दुस्साहस:— मदन राठौड़
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भाजपा विकास, राष्ट्रहित और पारदर्शी शासन की करती है राजनीति, कांग्रेस परिवारवाद, भ्रष्टाचार और झूठे आरोपों की राजनीति में उलझी:— मदन राठौड़
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सत्ता के नशे में चूर राजनीतिक ताकतों ने बाबा साहब के साथ अन्याय किया, उन्हें हराने के लिए 70 हजार से अधिक वैध मतों को किया था रद्द:— मदन राठौड़
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जयपुर, 13 अगस्त 2025। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जिन लोगों की दादी ने अनैतिक तरीके से चुनाव जीता था और जिनके चुनाव को देश की न्याय पालिका ने रद्द कर दिया था, वही लोग आज देश के लोकप्रिय और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाने का दुस्साहस कर रहे हैं। यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि जिनकी दादी ‘अनैतिक रूप से चुनाव जीती, वे अब 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाने वाले नेता पर आरोप लगा रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 11 वर्षों में भारत को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया है। भारत की अर्थव्यवस्था को 10वें स्थान से चौथे स्थान तक पहुंचाया, सैन्य ताकत को सशक्त किया, इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश का हर नागरिक गौरव की अनुभूति कर रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इंदिरा गांधी के शासनकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग किया। यही नहीं, जब देश की अदालत ने उनके चुनाव को अमान्य ठहराया, तब उन्होंने लोकतंत्र को कुचलते हुए आपातकाल (इमरजेंसी) लागू कर दी। गांधी परिवार की राजनीति सदैव स्वार्थ आधारित रही है, देश और आमजन के विकास से उनका कोई लेना-देना नहीं रहा है। आपातकाल के बाद करारी हार पर इंदिरा गांधी ने मतदाताओं को “एक झुंड मूर्खों का” कहा। वहीं 1989 में राजीव गांधी ने चुनावों से बैलेट पेपर हटाने की बात कही। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रोपेगेंडा मास्टर राहुल गांधी चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा कर रहे है। कांग्रेस का इतिहास साफ़ बताता है कि सत्ता के लिए चुनावी तंत्र से छेड़छाड़ उनकी पुरानी आदत है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता पुनरीक्षण एक नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है। हर वर्ष यह प्रक्रिया होती है, जिसमें नए नाम जोड़े जाते हैं और अनुपयुक्त नाम हटाए जाते हैं। यदि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाए गए हैं तो इसमें आपत्ति क्यों? क्या कांग्रेस इन्हें अपना वोट बैंक मानती है? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उस पर प्रश्नचिन्ह लगाना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। जब कांग्रेस सत्ता में होती है, तो संस्थाएं सही होती हैं, लेकिन जैसे ही हार होती है, वे उन्हीं संस्थाओं की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगते हैं। यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र और लोकतंत्र के प्रति अनास्था को दर्शाता है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा विकास, राष्ट्रहित और पारदर्शी शासन की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस परिवारवाद, भ्रष्टाचार और झूठे आरोपों की राजनीति में उलझी है। देश की जनता इन सबका भलीभांति मूल्यांकन कर चुकी है और बार-बार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर अपना विश्वास व्यक्त कर रही है।
राठौड़ ने बताया कि आज़ाद भारत के पहले आम चुनाव 1952 में, लोकतंत्र के इतिहास में एक बेहद काला अध्याय लिखा गया। उस समय कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ने मिलकर भारत के संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर को उनके लोकसभा क्षेत्र से पराजित करने के लिए सुनियोजित साज़िश रची। इनता ही नहीं, बाबा साहेब को हराने के लिए लगभग 70,000 से अधिक मतपत्रों को जानबूझ कर रद्द कर दिया गया। यह कोई साधारण चुनावी हार नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र और न्याय की मूल भावना के साथ किया गया विश्वासघात था। सत्ता के नशे में चूर राजनीतिक ताकतों ने उन्हीं के साथ अन्याय कर, लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंट दिया था। डॉ. अंबेडकर महज़ 14,000 से कुछ अधिक मतों से हार गए थे। अगर वे 70,000 से अधिक वैध वोट रद्द न किए जाते, तो इतिहास का परिणाम शायद बिल्कुल अलग होता। यह घटना स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास में पहली संगठित “वोट चोरी” के रूप में दर्ज हुई, और यह भी कटु सत्य है कि इसका शिकार देश के संविधान निर्माता स्वयं बने। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 90 चुनाव हार चुकी हैं इसलिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं।
















