आधुनिकता के नए परिवेश में श्री देव गौरी शंकर मंदिर

Shri Dev Gauri Shankar Temple in the 
new environment of modernity

नरसिंहपुर मुकेश राय

*गोटेगांव श्रीधाम नगर के मध्य में स्थित 150 वर्ष प्राचीन नागर शैली संस्कृति का अनूठा बेजोड़ श्री देव गौरी शंकर मंदिर अपने नए परिवेश में*
श्रावण मास में आने वाले शिव भक्तों के लिए तैयार है। अत्यंत सुंदर शैली में तैयार यह प्राचीन भव्य मंदिर का अपना इतिहास रहा है ।
कहते हैं कि आज से लगभग 200 वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के मूसानगर से आए दृढ़ोमर वैश्य परिवार के द्वारा मात्र एक दिन की कमाई से इस मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर जयपुर के प्रसिद्ध कारीगरों के द्वारा लगभग तीन से 5 वर्षों में तैयार हुआ।
श्री देव गौरी शंकर मंदिर में मध्य में श्री गौरी शंकर नंदी पर सवार हैं,बाऐं में मां नर्मदा एवं दाहिनी ओर मां सिंह वाहिनी विराजमान है ।साथ ही भगवान श्री कृष्ण- राधा अपने दिव्य स्वरुप में विराजमान है। मंदिर की आभा देखते ही बनती है। प्राचीन नक्काशी से तैयार परकोटा परिक्रमा के लिए है। मंदिर के गर्भगृह के सामने नवनिर्माण के तहत श्रद्धालुओं के बैठने भजन कीर्तन करने हेतु हाल का निर्माण किया गया है।कहने के लिए प्राचीन संस्कृति के साथ अपने आधुनिक रूप में समस्त श्रद्धालु भक्तों के लिए श्री देव गौरी शंकर मंदिर तैयार है। मंदिर के सामने वर्तमान में आधुनिकता के दर्शन के साथ श्री शिवलिंग पंचमूर्ति में विराजमान है। दूर-दूर से श्रद्धालु जो मंदिर के इतिहास को जानते हैं। वह सपरिवार अपनी मान्यता को लेकर के मंदिर में भगवान श्री देव गौरी शंकर जी के दर्शन के लिए अवश्य ही पहुंचाते हैं।
वर्तमान में सनातन धर्म के सभी पर्व हर्ष उल्लास के साथ श्री देव गौरी शंकर मंदिर में मनाए जाते हैं। शरद पूर्णिमा के पर्व पर अमृतमयी दूध प्रसाद का वितरण देर रात्रि तक किया जाता है।
मंदिर में खास तौर पर श्रद्धालुओं में महिलाओं की भीड़ विशेष रहती है। जो श्रावण मास में भगवान शिव का अभिषेक पूजन करती हैं। मंदिर ट्रस्ट के द्वारा समस्त श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। मंदिर ट्रस्ट समस्त श्रद्धालुओं को श्रावण मास के पावन पर्व पर भगवान श्री देव गौरी शंकर जी के दर्शन के लिए सादर आमंत्रित करता है।

abhay